Friday, 28 October 2016

यम का दीपक

जलते हुए दीपक ने कहा
जलुं मै अकेले यम के लिए
दिशा भी अकेली खड़ी राह में
अाज यम का स्वागत करने के लिए ।
घने अन्धकार में प्रकाश फैलाते
रहगुजर को राह दिखाते हुए
अपशकुन मिटाने का एक लेख बनकर
एक दिया ही काफी है राम मार्ग का विघ्न हरने के लिए।
लक्ष्मी -गणेश पूजन का शुभारम्भ
तरह तरह के टोटके
जुअा खेलेंगे भले ही हार का हो सामना
रातभर खोल दरवाजे, लक्ष्मी के आने का इन्तजार
ब्रह्ममुहुर्त में दलिदर भगाना
रात्रि  जागरण कर कुबेर को मनाएंगे।
राम आएंगे फिर
चहुँ दिशि करोड़ों दिये जगमगाएंगे ।
लटकने,बान्दना बना अल्पना से घर सजाएंगे
खुशियों के गीत गाएंगे
दीपावली  मनाएंगे
राम आएँगे
सुखद जीवन का वरदान देने
हर बरस,हर घर ,हर दिल में
जो खुशियाँ बांटना जानता है।
इसलिए हम भी विघ्न मिटाने के लिए
अकेले ही चलेंगे
क्योंकि  खुशियाँ  बांटने हमें आता है।


Saturday, 1 October 2016

पल भर की यादें

मेरे अपने कभी अल्फाज़ ऐसे कहते हैं
कि एक-एक शब्द से अातिश सा शोर होता है।
दिल की तमन्ना है कि घर में दिया एक जले
बाती जलती है तो धुआँ ज़रूर होता है।
गर हसरतें ख्वाब हो जाए, धरा आकाश हो जाए
अज़ाब पाकर भी उल्लास  नजर आता है।
एक उजाला ही मुकम्मल है जिन्दगी  के लिए
अांच की लौ में भी आफताब नजर अाता है।

Saturday, 9 May 2015

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Wednesday, 29 October 2014

meri astha

आस्था  का पर्व है यह 
सूर्य को मन से समर्पित ,
फूल  फल, नारियल  समर्पित 
दूध या फिर जल है अर्पित, 
भावना से प्रेरणा से 
कष्ट या फिर अर्चना से 
बस तेरी अरदास में मन 
तू मेरा भगवान है सुन 
निर्जला तुमको मै  पूजूं ,
जलनिधि में हो खड़ी 
कोई माने  या न माने 
बात तेरी है बड़ी ,
तू करे जिसपर कृपा 
जीवन सफल हो जाये उसका ,
हे प्रभु ! मेरा मन समर्पित ,
 तन समर्पित धन समर्पित,
मेरा ये जीवन समर्पित.।  


 

Tuesday, 21 October 2014

रावण

दिए जल रहे हैं हरतरफ हरगली में 
एक रावण मर गया है एक अभी बाकी  है

हम ख़ुशी में डूबे हैं देखता है कोई रावण 
कर दिया खुशियों को खाक जान केवल बाकी है ।
समन्दर के किनारे बैठकर लहरों को ना देखा
है खारे पानी सा जमीर , मोहब्बत इनमें बाकी है। 
वतन के नाम पर हर दिन गुनाह करते हैं 
वतनपरस्ती का नाम लेते हैं आदाब इनमें बाकी है।
अन्त होना है इकदिन भूल जाते हैं काफिर
राम जन्म तब तक होगा जब तक रावण बाकी है।




Wednesday, 20 August 2014

तुम नहीं हो






सुरमई  शाम है  पर  तुम नहीं हो 
काली घटा  है झूम रही पर तुम नहीं हो 

हवा जो आई तो लगा तुम आये 
एक झोंका था ख्यालों का ,पर तुम नहीं हो 

बादलों के गरज में ढूँढू  तुम्हें ,
साया था सन्नाटों का पर तुम नहीं हो 

लौटती चिड़ियों ने एक आस जग दी मन में 
रात  भी ढल गयी यादों में ,पर तुम नहीं हो 

चाँद आकर के मुझे रोज़ रुलाता है यूँ ही 
दिल के अरमान भी जगे है मेरे ,तुम नहीं हो