जोर चले भोरहीं से पछुआ ए राजा जी
लिट्टी-चोखा खाई दिन कटबो ए राजा जी ।
गोंइठा के ढेर करी अगिया जराइब।
आटा सानी सतुआ के भभरी बनाइब ।
तोप के पकाई राख झरबो ए राजा जी।।
लिट्टी चोखा खाई दिन कटबो ए राजा जी ।
लिटिया के संगवा में चूरमा अचार जी।
घीउवा में बोरब आपन नेहिया दुलार जी।।
आसन जमाइ कौर जिमिह ए राजा जी।।
लिट्टी चोखा खाई दिन कटबो ए राजा जी ।
लोटा भर पानी पीके राजा देखें पेयार से,
आजु दिन सपना बा सुधि आइल पार से
गुइयाँ के विभोर भइ चितवेली ए राजा जी।
।लिट्टी चोखा खाई दिन कटबो ए राजा जी ।।
डॉ रजनी रंजन,घाटशिला झारखंड।
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